गोपाल व्यास

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गोपाल व्यास पुष्करणा


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ना बोलो तो बेहतर होगा…

Posted On: 29 Jul, 2011  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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दुआ की ताक़त हमने देखी…

Posted On: 31 Mar, 2011  
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सिर्फ खेल नहीं है क्रिकेट…

Posted On: 29 Mar, 2011  
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sports mail में

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ऐसे जीते तो क्या जीते….

Posted On: 14 Mar, 2011  
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sports mail में

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मीडिया बना माई बाप…

Posted On: 7 Mar, 2011  
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Others पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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एक घाव पे मरहम तो दुसरे के taiy

Posted On: 1 Mar, 2011  
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बज़ट की राजनीति कब तक…

Posted On: 26 Feb, 2011  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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गठबंधन मज़बूरी या ज़रूरी ……

Posted On: 23 Feb, 2011  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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प्यार ईश्वर की अमूल्य भेंट -Valentine Contest

Posted On: 12 Feb, 2011  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

आप नेता के बोलने के अधिकार पर रोक नही लगा सकते । वो आपके काम पर दखल नही करता । आप सुबह से शाम तक कम करते हो जरुरी नही आपके हाथ सब काम सही हुआ हो । नोकरी हो तो बोस की, अपना धन्दा हो तो खूद की डान्ट खानी पडती है । लेकिन आप काम पर परमेनन्ट हो । आपके हाथ से कोई काम छिन नही सकता । नेता को तो बेचारे को मलुम ही नही वो आज ईधर है कल किधर होगा । नेता का काम दलालो जैसा है । पूरा महीना ग्राहको के पिछे जूते घीसते रहो, सौदा होता है तो कुछ हाथ लगता है, वरना महिना बेकार । नेता के लिये भी ऐसी घटना एक सौदा होता है । मौका मिलता है कुछ बोलने का । आपने देखा होगा होड लगती है । ऐसा मौका कौन चुकेगा, लोगो मे पेहचान ताजा होती है, कीसी के चहिते भी बना जा सकता है । लोग उन के छोटे मोटे अपराध या भ्रष्टाचा भूल सकते है ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya




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